रुद्रपुर/Kichha उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नागला से Kichha तक की महत्वपूर्ण सड़क को दो लेन से चार लेन में अपग्रेड करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। यह परियोजना खुरपिया इंडस्ट्रियल क्लस्टर (Khurpiya Industrial Cluster) की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए अहम मानी जा रही है, जो उत्तराखंड के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
परियोजना के मुख्य विवरण
- सड़क की लंबाई: लगभग 10.6 किलोमीटर (कुछ स्रोतों में 10.69 किमी भी बताया गया है)।
- वर्तमान स्थिति: यह सड़क फिलहाल दो लेन (SH-44) है, जो नागला से Kichha तक जाती है और Rudrapur क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
- अनुमानित लागत: ₹80.62 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स में ₹80 करोड़ के आसपास)।
- प्रस्ताव की स्थिति: PWD ने यह प्रस्ताव राज्य योजना के तहत मंजूरी के लिए भेजा है। नवंबर 2025 में प्रस्ताव भेजा गया था और जनवरी 2026 तक इस पर प्रक्रिया जारी है। टेंडर और डिटेल्ड एस्टीमेट भी जारी हो चुके हैं (PWD MIS पर उपलब्ध)।
- प्रोजेक्ट का आधार: यह योजना अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के अंतर्गत आ रही है, जिसका उद्देश्य पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में एकीकृत औद्योगिक क्लस्टर और आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करना है।
लाभ और प्रभाव
- खुरपिया इंडस्ट्रियल क्लस्टर तक भारी वाहनों की आवाजाही आसान होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे।
- क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- पूर्व कीछा विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगी और युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोलेगी।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस प्रोजेक्ट पर नजर रखे हुए हैं और इसे राज्य के औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
निर्माण का दायरा
- सड़क को चार लेन में बदलने के लिए भूमि अधिग्रहण, ट्री कटिंग (424 पेड़ों की कटाई का टेंडर जारी), ड्रेनेज, फुटपाथ और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल होंगे।
- PWD के Rudrapur प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता विनोद सनवाल ने पुष्टि की कि प्रस्ताव सबमिट कर दिया गया है और यह खुरपिया इंडस्ट्रियल क्लस्टर तक परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा।
पृष्ठभूमि
यह परियोजना उत्तराखंड के बड़े रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का हिस्सा है, जिसमें 5,700 किमी ग्रामीण सड़कों का अपग्रेडेशन और अन्य बाइपास प्रोजेक्ट शामिल हैं। 2021 में भी इस सड़क के फोरलेन होने की चर्चा हुई थी, लेकिन अब AKIC के तहत यह गति पकड़ रही है।
