किच्छा – एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा स्वीकृत $200 मिलियन (लगभग ₹1,680 करोड़) के ऋण से उत्तराखंड में उत्तराखंड लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (Uttarakhand Livability Improvement Project) के तहत कीछा सहित कई शहरों में जल आपूर्ति, स्वच्छता और अन्य शहरी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विकास कार्य चल रहा है। यह परियोजना अक्टूबर 2024 में ADB द्वारा मंजूर की गई थी और नवंबर 2024 में भारत सरकार तथा ADB के बीच ऋण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
परियोजना के मुख्य उद्देश्य और विवरण
- कवरेज: किच्छा, चंपावत, कोटद्वार और विकासनगर — इन चार शहरों में जल आपूर्ति सेवाओं को 100% कवरेज तक पहुंचाना।
- मुख्य कार्य:
- 1,024 किलोमीटर जलवायु-सहिष्णु (climate-resilient) पाइपलाइन का निर्माण, जिसमें स्मार्ट वाटर मीटर शामिल होंगे।
- 26 ट्यूबवेल का निर्माण, जिनकी दैनिक क्षमता 72,131 क्यूबिक मीटर होगी।
- नए जलाशयों का निर्माण, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 17,350 क्यूबिक मीटर होगी।
- 3.5 मिलियन लीटर प्रति दिन क्षमता वाला नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट।
- अन्य लाभ: ये सुविधाएं जलवायु परिवर्तन, बाढ़ और अन्य पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति मजबूत होंगी। इससे पानी की गुणवत्ता, उपलब्धता और वितरण में सुधार होगा, साथ ही पानी की बर्बादी कम होगी।
- किच्छा पर विशेष फोकस: किच्छा में मौजूदा जल आपूर्ति व्यवस्था पुरानी और अपर्याप्त होने के कारण कई इलाकों में पानी की कमी रहती है। इस प्रोजेक्ट से घर-घर नल कनेक्शन, बेहतर दबाव वाली आपूर्ति और 24×7 पानी की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है।
परियोजना की कुल लागत और फंडिंग
- कुल अनुमानित लागत: $465.9 मिलियन।
- ADB का योगदान: $200 मिलियन।
- यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (EIB) का समानांतर योगदान: $191 मिलियन।
- उत्तराखंड सरकार का योगदान: $74.9 मिलियन।
- कार्यान्वयन एजेंसी: उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (UUSDA) और संबंधित विभाग।
प्रभाव और अपेक्षित लाभ
- स्थानीय निवासियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए।
- जलजनित रोगों में कमी और स्वास्थ्य सुधार।
- शहरी विकास को बढ़ावा, क्योंकि बेहतर जल आपूर्ति औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी जरूरी है।
- पर्यावरण संरक्षण: स्मार्ट मीटर और क्लाइमेट-रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर से पानी का बेहतर प्रबंधन।
- किच्छा जैसे छोटे शहरों में यह परियोजना लंबे समय से लंबित पानी की समस्या का स्थायी समाधान साबित होगी।
यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के विजन 2030 के अनुरूप है, जिसमें 2030 तक सभी शहरों में पूर्ण और कुशल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। कार्य प्रगति पर है और अगले कुछ वर्षों में किच्छा में प्रमुख निर्माण कार्य पूरे होने की उम्मीद है।
